झारखंड का यह जिला है स्वर्ग, यहां की खूबसूरत वादियां कर देगी दीवाना

झारखंड प्राकृतिक खूबसूरती से भरा हुआ है, झारखंड में कई झरने मौजूद है जो और भी झारखंड को प्रसिद्ध बनाते हैं, लेकिन झारखंड का एक ऐसा जिला है जहां जाने के बाद स्वर्ग जैसा फील होता है, दरअसल हम जिस जिले की बात कर रहे हैं उसका नाम है पलामू, यह जिला प्राकृतिक सौंदर्य से भरा हुआ है, इस जिले की खूबसूरत वादियां आपको दीवाना बना देगी.

पलामू ज़िला 1 जनवरी 1892 को बना था.पलामू, झारखंड का सबसे पश्चिमी ज़िला है. इसका मुख्यालय मेदिनीनगर है.पहले इसे डालटनगंज के नाम से जाना जाता था. डालटनगंज का नया नाम मेदिनीनगर है, जो राजा मेदिनी राय के नाम पर पड़ा. पलामू अपने प्राकृतिक सौंदर्य के लिए जाना जाता है. यहां घने जंगल, उद्यान और नदियां हैं. पलामू ज़िले में प्रसिद्ध बेतला नेशनल पार्क है, जो पर्यटकों को आकर्षित करता है. पलामू प्रमंडल में तीन ज़िले शामिल हैं: गढ़वा, लातेहार और पलामू.

पलामू जिले में सबसे प्रसिद्ध जगह बेतला नेशनल पार्क है यहां लाखों सैलानी हर साल घूमने आते हैं,बेतला नेशनल पार्क लातेहार और पलामू के जंगलों में विस्तृत है, राष्ट्रीय उद्यान भारत में सबसे अधिक देखे जाने वाले पर्यटक स्थलों में से एक है बेतला नेशनल पार्क अपनी अद्भुत वनस्पतियों और जीवों के साथ-साथ अपने अद्भुत पशु जीवन के लिए प्रसिद्ध है. आप इस पार्क के जंगल में जंगली हाथियों को घूमते हुए अपने आंखों से देख सकते हैं इतना ही नहीं इस पार्क में बाघ बायसन,तेंदुए जैसे और भी कई जंगली जानवर देखने को मिलते हैं.

 

झारखंड का यह जिला है स्वर्ग
झारखंड का यह जिला है स्वर्ग

इसकी स्थापना 1974 में हुई थी. दुनिया की पहली बाघ जनगणना 1932 में बेतला नेशनल पार्क के जंगल में शुरू हुई. यह झारखंड में स्थित पलामू टाइगर रिजर्व और महुआदार भेड़िया अभयारण्य का संयोजन है. बेतला का ऐतिहासिक महत्व उस राष्ट्रीय उद्यान के कारण है जहां दुनिया की पहली बाघ जनगणना हुई थी. इसी वजह से बेतला नेशनल पार्क इतना प्रसिद्ध है. अगर आप भी यहां जाना चाहते हैं तो नीचे हमने बेतला नेशनल पार्क पहुंचने के बारे में बताया है.

झारखंड का यह जिला है स्वर्ग
झारखंड का यह जिला है स्वर्ग

बेतला राष्ट्रीय उद्यान कैसे पहुंचें?

पलामू के मुख्यालय डाल्टेनगंज शहर से बेतला उद्यान की दूरी 35 किलोमीटर है, वही झारखंड राज्य की राजधानी रांची से दूरी NH39 के माध्यम से 175 किमी है. यहां हवाई जहाज के माध्यम से भी जाया जा सकता है, यहां पहुंचने के लिए निकटतम हवाई अड्डा डाल्टनगंज में चियांकी हवाई अड्डा है,यहां रेलवे मार्ग से भी पहुंचा जा सकता है जिसका निकटतम रेलवे स्टेशन मेदिनीनगर (डाल्टनगंज) में है.

इसके अलावा पलामू जिले में और भी कई प्रसिद्ध स्थान है जो पलामू को और भी प्रसिद्ध बनाते हैं जिनमें शामिल है पलामू का किला जहां चेरो राजाओं का निवास स्थान था. पलामू किला एक लोकप्रिय पर्यटन स्थल है. यह किला पहाड़ों के चारों ओर के बीच बनाया गया है. यहां घूमने में एक अलग ही आनंद आता है.

पलामू जिले की आबादी और बोली?

2011 की जनगणना के मुताबिक, पलामू ज़िले की 65.49% आबादी हिंदी बोलती थी. इसके अलावा, 24.44% लोग मगही, 6.87% लोग उर्दू और 1.15% लोग पालमुहा बोलते थे.

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