महाराणा प्रताप एक ऐसे भारतीय योद्धा जिनके नाम सुनकर दुश्मन कांपता था

भारतीय इतिहास में महाराणा प्रताप ही एक ऐसा योद्धा रहे जिनका नाम सुनकर मुगल बादशाह अकबर थर-थर कांपता था ये आज सभी के हृदय में बसे हुए हैं इन्होंने अकबर की अधीनता स्वीकार नहीं की और कई सालों तक संघर्ष किया, अकबर महाराणा प्रताप को कभी हरा नहीं सका।

भारत देश मे मुगलों ने कई वर्षों तक राज किया। उस समय देश के लोग मुगलों के गुलाम हुआ करते थे मुगल बादशाह देशवासियों के साथ दुर्व्यवहार किया करते थे और सभी को अपना गुलाम बनाकर रखते थे, जहां एक तरफ मुगल अपना शासन जताया करते थे वहीं दूसरी तरफ धर्म कर्म व सभी गुणों से परिपूर्ण भारतीय योद्धा महाराणा प्रताप उन चुनिंदा शासको में से एक थे जिनकी वीरता और शौर्य पराक्रम के किस्से आज भी गौरव में है जिनका नाम सुनकर अकबर भी डर के मारे थर थर कांपने लगता था।

कौन थे वो वीर योद्धा जिससे अकबर डरता था?

महाराणा प्रताप 15वीं शताब्दी के समय राजस्थान की सबसे बड़ी और शक्तिशाली रियासत मेवाड़ के राजा राणा उदय सिंह के पुत्र थें। ये बचपन से ही अत्यंत शक्तिशाली और निडर बालक थें,  इन्होंने बचपन से ही युद्ध में भाग लेना शुरू कर दिया था, इनका मानना था कि हमारी संस्कृति पर किसी की आंच नहीं आनी चाहिए अगर ऐसा हुआ तो कितना भी बड़ा शक्तिशाली योद्धा क्यों न हो उसे उखाड़ फेकेंगे,इतिहासकार बताते हैं कि इन्होनें कम उम्र में ही मुगलों से युद्ध करना शुरू कर दी थी। जब भारत में मुगलों का शासन हुआ करता था तब भारत में सिर्फ एक ही वीर योद्धा रहे जो कि मुगलों से कभी भी नहीं डरते थे बल्कि मुगल बादशाह ही उनसे इतना ज्यादा डरते थे कि कभी-कभी तो मुग़ल बादशाह अकबर के सपने में ये धमकी देते हुए दिखते थे जिससे कि अचानक से अकबर की नींद खुल जाती थी और अकबर इस बुरे सपने से थर-थर कांपने लगता था। आप सभी को बता दे कि मुग़ल बादशाह अकबर भारतीय योद्धा महाराणा प्रताप से डरता था यहां तक की इनके नाम से भी वह डर के मारे कांपने लगता था। 1576 ई. में हल्दीघाटी युद्ध में मात्र 20000 सेना के साथ महाराणा प्रताप ने अकबर की विशाल सेना को धुल चटा दिया था,जिसमें अकबर को जीत हासिल नहीं हुई और राजपूतों का युद्ध कौशल देखकर अकबर घबरा गया। काफी लंबे समय तक यह युद्ध चलता रहा जिसमें महाराणा प्रताप की सेना ने विजय हासिल की । अकबर महाराणा प्रताप से तो डरता ही था लेकिन इसके साथ-साथ महाराणा प्रताप की तलवार को देख कर भी वह डर के मारे पसीना पसीना हो जाता था। इतिहासकार बताते हैं कि महाराणा प्रताप का वजन 110 KG था और इनकी लंबाई 7 फीट 5 इंच थी। ये अपने शरीर पर कुल वजन 360 किलो लेकर के युद्ध मैदान में उतरते थे जिसमें इनके भाला का वजन 81 किलो, इनके छाती का कवच का वजन 72 किलो और 208 किलोग्राम वजन वाली दो तलवारें था ।

महाराणा प्रताप को किसने मारा 

महाराणा प्रताप एक ऐसे योद्धा थे जिन्होंने कभी मुगलों के खिलाफ हार नहीं मानी अंतिम सांसों तक इन्होंने लड़ता रहा।  भारत के बड़े-बड़े राजा महाराजाओं ने मुगल शासक अकबर की अधीनता को स्वीकार कर लिया लेकिन महाराणा प्रताप ने कभी भी अकबर की अधीनता स्वीकार नहीं की।  लोग जानना चाहते हैं कि आखिर महाराणा प्रताप को किसने मारा तो आपको बता दें कि महाराणा प्रताप को मारने वाला ऐसा कोई भी योद्धा पैदा नहीं हुआ था महाराणा प्रताप को किसी ने नहीं मारा था उन्होंने अपने ही धनुष से खुद को मार कर दुनिया को अलविदा कह कह गए । महाराणा प्रताप की मृत्यु 19 जनवरी 1597 में अपनी नई राजधानी चावण्ड में हुई थी। चावण्ड राजस्थान के सलूंबर ज़िले में स्थित एक नगर है, जो बेहद ही खूबसूरत और आकर्षित नगर है। इनकी बहादुरी की गाथा भारत के सभी लोगों के रग-रग में बसता है, महाराणा प्रताप दुनिया को यह सिखा कर चले गए किसी के सामने घूमने नहीं टेकना चाहिए इसी कारण से महाराणा प्रताप को लोग आज भी जानते हैं और आने वाले समय में भी महाराणा प्रताप का नाम सर्वप्रथम रहेगा ।

अकबर, महाराणा प्रताप के मौत की खबर सुनकर फुट फूट कर रोया था

इतिहासकार बताते हैं कि बादशाह अकबर महाराणा प्रताप की मौत की खबर सुनकर फुटकर रोया था। महाराणा प्रताप ने कभी भी अकबर के सामने अपना सिर नहीं झुकाया। महाराणा प्रताप की वीरता ऐसी थी कि जिसे देखकर दुश्मन के भी छक्के छूट जाते थे। लेकिन राणा प्रताप ही एक ऐसे योद्धा थे जिनकी मरने पर अकबर की भी आंखें नम हो गई थी। इस वीर भारतीय योद्धा को बड़े ही श्रद्धा पूर्वक याद किया जाता है और आने वाले समय में भी इस वीर पुरुष को याद किया जाता रहेगा। इनका नाम इतिहास में वीरता, शौर्य, त्याग, पराक्रम और दृढ प्रण के लिये अमर है।

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