क्या आप जानते हैं मुर्गियां संभोग से पहले क्यों दौड़ती हैं? Murgi Sambhog Se Pehle Kyu Daudati Hai ?

Murgi Sambhog Se Pehle Kyu Daudati Hai : अक्सर हम सभी लोगों ने देखा है कि मुर्गीया संभोग से पहले दौड़ती है, लेकिन आखिर मुर्गियां संभोग से पहले ऐसा क्यों करती है, अगर आप भी इस सवाल का जवाब नहीं जानते हैं तो इस आर्टिकल के माध्यम से आज हम लोग जानने वाले हैं, ऐसा कहा जाता है कि मुर्गियों की उत्पत्ति दक्षिण पूर्व एशिया, दक्षिण एशिया, और पूर्वी एशिया में हुई थी. भारतीय उपमहाद्वीप में पाई जाने वाली प्रजातियों की उत्पत्ति अमेरिका, यूरोप, मध्य पूर्व, और अफ़्रीका से में हुई थी.

मुर्गियां संभोग से पहले क्यों दौड़ती हैं? Murgi Sambhog Se Pehle Kyu Daudati Hai ?

आप सभी को बता दे की संभोग से पहले मुर्गीया इसलिए दौड़ती है क्योंकि वे मुर्गे की फिटनेस (fitness) और सहनशक्ति की परख करती है. मुर्गियां अपने साथी से दूर भाग कर अपनी शक्ति को दिखाना चाहती है, मुर्गियां अवांछित ध्यान और आक्रामकता से बचना चाहती हैं. संभावित साथी से दूर भागना अन्य मुर्गों या मुर्गियों के साथ संघर्ष और प्रतिस्पर्धा से बचने का एक तरीका है. यही कारण है कि मुर्गियां संभोग से पहले इधर-उधर दौड़ती है और भागती है.

ऐसा भी कहा जाता है कि मुर्गियों को संभोग से पहले दौड़ना प्रजनन क्षमता का प्रदर्शन, मुर्गे का ध्यान आकर्षित करना, प्रभुत्व स्थापित करना और तनाव कम करना हैं। ऐसा करने से हार्मोनों द्वारा नियंत्रित होता है. अक्सर आप लोगों ने देखा होगा कि मुर्गे नृत्य करते हैं, अपने पंखों को जमीन की ओर मजबूती से गिराकर और कांपते हुए मुर्गी के चारों ओर चक्कर लगाते हैं. जैसे ही वह कर्कश आवाज़ करते हुए उसके चारों ओर चक्कर लगाता है, वह या तो उसे प्रोत्साहित करेगी या भागने की योजना बनाने की कोशिश करेगी. मुर्गों में इस जीन के जागते ही मर्दाना अंग सिकुड़ जाता है. चूंकि मुर्गियों और कुछ दूसरे पक्षियों के मर्दाना अंग नहीं होते, इसलिए उनमें प्रजनन की प्रक्रिया शिश्न के बिना प्रवेश के ही संभव हो जाती है.

मुर्गियों के बारे में अन्य जानकारी

जानकारी के लिए आप सभी को बता दे की मुर्गियां सर्वाहारी होती हैं. खाने के अलावा मुर्गियों का इस्तेमाल मनोरंजन और कीट नियंत्रण में भी किया जाता है. मुर्गियों की बीट और फाइबर का इस्तेमाल ईंधन और खाद के रूप में किया जाता है. मुर्गियों के पंखों से ऑर्गेनिक प्लास्टिक भी बनाया जाता है. आप सभी को बता दे की मुर्गियां एक वर्ष में कम से कम 150 से 250 अंडे देती हैं. चूजे भी लगभग 5 से 6 महीने में अंडे देना शुरू कर देते हैं.

आप सभी को बता दे कि भारत में कई नस्लों की मुर्गियां भी पाई जाती हैं. जिनमें शामिल है टेनिस, नेकेड नेक, पंजाब, ब्राउन, घागस, लोलाब, कश्मीर फैबरेला, टिलरी, बुसरा, टेलिचेरी, डंकी, निकोराई, और कालाहस्ती जैसी नस्लें भारत में पाई जाती हैं, वहीं इन सभी नस्लों में सबसे शुद्ध करकनाथ और बुसरा नस्ल को माना जाता हैं.

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