MP : आस्था या अंधविश्वास! सिंगरौली में हुआ चमत्कार,अचानक पेड़ से निकलने लगा पानी

मध्य प्रदेश के सिंगरौली जिले के विंध्यनगर स्थित एनटीपीसी कॉलोनी(NTPC Colony) गेट के 10 कदम आगे एक पेड़ से अचानक पानी निकल रहा है, जिसे देखकर हर कोई हैरान है,की ये पानी कहा से आ रहा हैं यहां के लोग इसे चमत्कार मान रहे हैं और पूजा-पाठ कर रहे हैं-

Singrauli: सिंगरौली जिले के विंध्यनगर स्थित एनटीपीसी कॉलोनी गेट के 10 कदम आगे एक पेड़ से  अचानक पानी निकलने लगा. यहां के स्थानीय लोगों ने जब पेड़ से पानी निकलते हुए देखा तो इस पेड़ के पास पूजा अर्चना करने लगे.देखते ही देखते यहां सैकड़ों की तादात में भीड़ जमा हो गई. इसे हर कोई चमत्कार बता रहा है लोग यहां पर चुनरी नारियल और अगरबत्ती चढ़ाकर पूजा-अर्चना कर रहे हैं देखने के लिए लोग दूर-दूर से आ रहे हैं. इस चमत्कारी पेड़ को लोग कई तरह के नाम दे रहे हैं. जब लोग धीरे-धीरे इस पेड़ को देखने के लिए पहुंचे तो कुछ लोगों के द्वारा चमत्कार बताया जा रहा है तो वहीं कुछ लोग के द्वारा अंधविश्वास भी बताया जा रहा है.

सिंगरौली के इस पेड़ की आराधना में जुटे लोग

जैसे-जैसे लोग सुन रहे हैं कि एक पेड़ से पानी निकल रहा है तो लोग धीरे-धीरे देखने के लिए लोग इकट्ठा हो रहे हैं. लोग यहां पर नारियल फोड़ कर पूजा अर्चना कर रहे हैं. हालांकि, जिस तरह से सिंगरौली जिले के विंध्यनगर गेट के पास एक पेड़ से पानी निकल रहा है, जिसे लोग अन्य अलग-अलग नाम दे रहे हैं कोई इसे कपास तो कोई इसे फूल वाला पेड़ और कोई तो इसे खैमार का पेड़ बता रहे हैं.इस पेड़ से पानी निकलता देख हर कोई हैरान है. लोग इसे दैविक चमत्कार मान कर आस्था से जोड़ रहे हैं. पेड़ के ऊपर की टहनी से पानी निकलकर तना के सहारे पानी जमीन पर काफी मात्रा में बह रहा है. इसकी जानकारी लगते ही मौके पर आसपास के लोग इकट्ठा हो गए और पूजा अर्चना में जुट गए. हैरानी की बात यह है कि यह पेड़ दो भागों में विभाजित है लेकिन एक ही तरफ के तनें में पानी का  रिसाव हो रहा है, जबकि दूसरे तने में पानी का रिसाव नहीं हो रहा है वह बिल्कुल सूखा हुआ है, जिसके कारण लोगों का विश्वास और भी मजबूत हो रहा है की यहां साक्षात भगवान प्रकट हुए है.

सिंगरौली

मुख्य रूप से यह पेड़ ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड सहित अन्य अफ्रीकी देशों में पाया जाता है भारत में इसकी संख्या न के बराबर है. इस पेड़ को अन्य देशों में अलग-अलग नामों से जाना जाता है,भारत में इस पेड़ को ईफ्लोरा के नाम से जाना जाता है.जिसके फूल काफी आकर्षक एवं मनमोहक होते हैं इसके फल 1 फीट लम्बे होते है.इस पेड़ की पंखुड़ी का आकार अधिक गोलाकार होता है। इस पेड़ को स्थानीय भाषा में खैमार कहा जाता है,यह पेड़ 45 फीट या उससे अधिक ऊंचाई का लंबा पेड़,होता है । यह एरिथ्रिना(erythrina) की एक प्रजाति है,यह पेड़ दक्षिण भारत के पहाड़ी इलाकों में कॉफी बागानों के आसपास पाए जाते हैं। अन्य देशों में  यह पेड़ सुगंधित फूलों के कारण बागों में लगाया जाता है,और जिसकी खासियत यह है कि चंदन के पेड़ जैसा ठंडा होता है जिसके कारण इसमें सांप भी पाए जाते हैं और भारत में इसे चाय बागान में रखरखाव के लिए लगाया जाता है, इस पेड़ को चाय बागान में लगाने से चाय के पतियों पर लगने वाले कीट पतंगों से बचाव भी करता है. यह पेड़ पर्यावरण को दूषित होने से बचाता हैं,यह पेड़ कई बीमारियों के इलाज में भी काम आता है, यह पेड़ अत्यधिक आद्र वाला पेड़ होता है, जो पानी को अवशोषित कर आसपास के वातावरण को ठंडा बनाता है. यह पेड़ ज्यादा पानी शोषित करने के कारण इस पेड़ में पानी अधिक मात्रा में बढ़ जाता है जिसके बाद इसके टहनियों के द्वारा पानी धीरे-धीरे बहने लगता है. जिसे देखते हुए एनटीपीसी विंध्यनगर ने पर्यावरण को दूषित होने से बचाने के लिए इस पेड़ को लगाया था.जिसके बारे में किसी को जानकारी नहीं थी जब पेड़ से अचानक पानी निकलने लगा तो धीरे-धीरे लोगों की संख्या बढ़ने लगी और लोग यहां पूजा अर्चना करने लगे,और आस्था का केंद्र बना हुआ है अब इसे चमत्कार कहे या अंधविश्वास.

स्थानीय लोग धूप, अगरबत्ती और फूल माला,चुनरी लेकर इस पेड़ की आराधना करने में जुट गए. स्थानीय लोगों का कहना है कि कुछ दिनों से इस पेड़ से जमीन पर पानी बह रहा है .अब इसे दैवीय चमत्कार कहें या फिर कोई भौतिक प्रक्रिया, लेकिन स्थानीय लोग यहां पर इसे भगवान का प्राकट्य मान रहे हैं. जानकार मानते हैं कि पेड़ों में इस तरह की चीजें अक्सर देखने में मिलती हैं, लेकिन श्रद्धा है कि इसे चमत्कार के अलावा कुछ भी मानने को तैयार नहीं है. धीरे-धीरे लोग यहां अत्यधिक मात्रा में इकट्ठा हो रहे हैं और पूजा अर्चना कर रहे हैं,यहां पर मंदिर बनवाने की भी बात कर रहे हैं कुछ लोग बताते हैं कि यहां पर आज से 50 साल पहले चंदूली गांव हुआ करता था जिस गांव में बरम बाबा का वास था, बरम बाबा यहां की देखरेख करते थे, जो आज पुनः एक बार फिर अपना चमत्कार दिखा रहे हैं, लोक चमत्कार के अलावा कुछ भी मानने को तैयार नहीं है जबकि इस पेड़ की खासियत है कि इसमें रोग लगा करते हैं जिसके कारण इसमें झाग नुमा रोग लगता हैं,जो बर्फ की तरह होता है, जिसकी मात्रा अत्यधिक होने की वजह से धीरे-धीरे पिघल कर पानी का रूप ले लेता है और यह टहनियों द्वारा धीरे-धीरे रिसने लगता है और जमीन पर बहने लगता है लेकिन यहां के लोग इसे चमत्कार मान कर पूजा अर्चना कर रहे हैं.

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